विश्व की प्रमुख जनजातियां in hindi ( major tribes of world)

 विश्व की प्रमुख जनजातियों को जनजातीय लोग कहा जाता है, प्रथम लोग और देशी लोग, ये मूल निवासी अपने आपको कई नामों से पुकारते हैं और ये विश्व की जनसंख्या का लगभग 6.2% है। इन जनजातियों की संस्कृति में अत्यधिक विविधता पाई जाती है। आदि काल से ही इनका शोषण होता रहा है जो आज भी जारी है। कुछ विद्वान उनको परमात्मा का स्वरूप समझते हैं तो कुछ उनको आर्थिक उन्नति में बाधा समझते हैं। वास्तव में वे ऐसे लोग हैं जो प्रकृति से गहरा सम्बन्ध रखते हैं, उनको अपनी परम्पराओं से प्यार है। 

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इनमें से बहुत-से लोग आखेट युग में, कुछ कारखानों में काम करते, कुछ का जीवाकोपार्जन सरकारी नौकरियों से होता है। विकसित समाज की धन के द्वारा सहायता भी करते हैं। 

विश्व में 370 मिलियन से अधिक लोग जनजाति वर्ग के हैं तुलनात्मक रूप से इनका जीवन स्तर नीचा है। साक्षरता एवं शिक्षा में भी पीछे हैं तथा इनकी औसत आयु भी कम है, परन्तु अपनी जीवन शैली एवं संस्कृति उनकी अलग पहचान बनाती है। उनमें जागरूकता बढ़ी है तथा वह अपने संसाधनों तथा भूमि को फिर से प्राप्त करना चाहते हैं। नगरीकरण तथा औद्योगीकरण से इनकी संस्कृति को भारी हानि पहुँच रही है। आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, साइबेरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के आदिवासियों को भारी क्षति हुई है।

अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर संगठन के अनुसार, अनुमानतः विश्व में 476.6 मिलियन आदिवासी लोग हैं जो 5000 विभिन्न समूहों से सम्बन्धित हैं और विश्व स्तर पर 90 देशों में है। आदिवासी लोग विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में रहते हैं, लेकिन उनमें से लगभग 70% लोग एशिया और प्रशान्त में रहते हैं इसके बाद 16.3% अफ्रीका में, 11.5% लेटिन अमेरिका में और कैरिबियन, 1.6% उत्तरी अमेरिका और 0.1% यूरोप और मध्य एशिया में हैं।

इन्डीजीन्स की कोई सार्वभौमिक परिभाषा नहीं है, हालांकि इनमें विशेषताएं हैं जो आदिवासी लोगों में सामान्यतः प्रवृत्ति होती है:

  • आदिवासी लोगों की जनसंख्या भिन्न है जो अपने देश की उत्तर उपनिवेशी संस्कृति से प्रमुख रूप से सम्बन्धित है। वर्तमान उत्तर उपनिवेशी देशों में वे अधिकांशतः अल्पसंख्यक हैं। बोलीविया और ग्वाटेमाला में आदिवासी लोगों की जनसंख्या वहाँ की जनसंख्या के आधे से भी अधिक है।

  • आदिवासी लोगों की प्रायः अपनी भाषा, संस्कृति और परम्पराऐं हैं जिन पर उनके पूर्वजों के साथ रहने के सम्बन्धों का प्रभाव दिखाई देता है। आज आदिवासी लोग 4000 भाषाएँ बोलते हैं।
  • आदिवासी लोगों की सांस्कृतिक परम्पराऐं अलग हैं जो आज भी व्यवहार में हैं। 
  • आदिवासी लोगों की अपनी भूमि और क्षेत्र है जिनसे वे असंख्य तरीकों से बंधे हुए हैं। 

आदिवासी लोग स्वयं की पहचान आदिवासी की तरह है आदिवासी लोगों के उदाहरणों में आर्कटिक के पदनतज, एरीजोना के सफेद पर्वतीय अपाचे, यानोमामी और अमेजन के तुपी लोग सम्मिलित हैं, पारम्परिक रूप से ये पशुचारक हैं / 

 अफ्रीका के आदिवासी  (Indigenous of Africa)

 अफार (Afar)

अफ़ार आदिवासी इथोपिया, इरीट्रिया, जबूती तथा सोमालिया के रहने वाले हैं। इनमें से अधिकतर आखेट युग  में हैं तथा कुछ लोग अल्प-विकसित कृषि करके ज्वार, मक्का तथा दलहन की कृषि भी करते हैं।

बाका (बबिंगा, ब्याका, बिबापा, बबेगा)

बाका कैमरून के दक्षिणी-पूर्वी भाग के जंगलों के रहने वाले हैं, जिनकी संख्या लगभग 40 हजार है। 

बंटू (Bantu) दक्षिणी तथा दक्षिणी-पूर्वी अफ्रीका की बन्दु एक प्रमुख जनजाति है। इनमें से अधिकतर तंजानिया, केन्या, ज़िम्बाब्वे तथा इथोपिया में रहते हैं।

बेम्बा (Bemba) जाम्बिया की रहने वाली यह जनजाति छोटे-छोटे अधिवासों में रहती है। प्रत्येक अधिवास की जनसंख्या 100 से 200 तक होती है। इनकी कुल जनसंख्या लगभग ढ़ाई लाख है। यह लोग अल्पविकसित कृषि करते हैं तथा समय मिलने पर आखेट भी करते हैं। 

बरबर (Berber)

अल्जीरिया, मोरक्को तथा ट्यूनीशिया के मरुस्थलों में रहने वाले बरबर ख़ानाबदोश (Nomads) हैं। ये पशुपालन तथा व्यापार भी करते हैं।

बुशमैन शान (Bushman, San)

कालाहरी के मरुस्थल में रहने वाले बुशमैन को शान भी कहते हैं। ये जनजातियाँ बोत्सवाना तथा नामीबिया के रहने वाले हैं। आखेट युग के ये लोग सरल जीवन बिताते हैं और अपने सीमित प्राकृतिक संसाधनों का उपयुक्त उपयोग करते हैं

डिंका (Dinka)

डिंका सूडान की जनजाति है। इनकी कुल जनसंख्या लगभग 15 लाख है। अफ्रीका में डिंका सबसे लम्बे कद की जनजाति है। यह नील नदी के बेहरूनग़जल के क्षेत्र मे रहती है। पशुपालन तथा जीवन निर्वाह कृषि इनका मुख्य कार्य है।

इफी (Efe)

विश्व में सबसे छोटे कद के लोग इफी हैं। यह जनजाति कांगो गणतंत्र के जंगलों में रहती है और तीर-कमान से

शिकार करती है। इसके अतिरिक्त ये जंगलों से कन्द-मूल तथा फल-फूल भी एकत्रित करते हैं।

फुला/फुलानी (Fula/Fulani)

फुलान जनजाति प. सहारा के देशों में रहती हैं। इनकी जनसंख्या लगभग 2.7 करोड़ है जो चाड, आइवरी कोस्ट,

गिनी, गिनी-बिस्साऊ, गैम्बिया, घाना, लाइबेरिया, माली, मॉरिटानिया, नाइजर, नाइजीरिया, सेनेगल, सिएरा लियोन,

सूडान तथा टोगो में रहती है। ये इस्लाम धर्म के मानने वाले खानाबदोश हैं।

होटेण्टोट (Hottentot)

होटेण्टोट जनजाति द. अफ्रीका के कारू मरुस्थल एवं अर्द्ध-मरुस्थल में रहती है। ये पशुपालन करते हैं तथा पशुओं को बोझा ढोने के काम मे भी लाते हैं। किकुयूज (Kikuyus) केन्या में रहने वाले किकुयूज मूलतः खेती करते हैं। इनकी मुख्य फसलों मे ज्वार, मक्का तथा दालें सम्मिलित हैं।

लेसी (Lese)

नीग्रो प्रजाति के लेसी पिग्मी आखेट तथा कन्द-मूल पर जीवन निर्वाह करते हैं। ये कांगो बेसिन के घने जंगलों में

रहते हैं।

मबूती (Mabuti)

मबूती पिग्मी जनजाति, कांगो बेसिन के इतूरी जलप्रांतों में रहती है। इनका जीवन निर्वाह आखेट तथा कन्द-मूल,

फल-फूल पर है 

मसाई (Masai)

पूर्वी अफ्रीका के पठारी भाग (कीन्या/युगाण्डा) के आदिवासी मसाई पशुपालन करते हैं। इनका कद लम्बा,

शरीर पतला तथा भुजायें लम्बी होती हैं। इनकी त्वचा का रंग चॉकलेटी होता है। यह काले तथा लाल रंग के बैल

पालते हैं। इनके कबीले भी काले तथा लाल रंग के बैलों से सम्बोधित किए जाते हैं।

न्यूर (Nuer)

सूडान तथा इथोपिया में रहने वाली न्यूर जनजाति पशु-पालन पर जीवन निर्वाह करती हैं।

(Pygmies)

कांगो बेसिन में रहने वाले छोटे कद के लोगों को पिग्मी कहते हैं। ये आखेट तथा कन्द-मूल पर जीवन निर्वाह करते हैं।

शिलुक अथवा चोलो (Shilluk or Chollo)

सूडान की एक प्रमुख जनजाति जो पशुपालन करती है। ये ईसाई धर्म के मानने वाले है।

योरूबा अथवा बोलोकी

(Yorubas or Boloki)

यह जनजाति नाइजीरिया तथा बेनिन देशों में गिनी की खाड़ी के तट पर रहते हैं। ये कुशल किसान हैं। आबिदजान इनकी संस्कृति का प्रमुख नगर है।

जुलू (Zulu)

द. अफ्रीका के नेटाल राज्य की जनजाति जुलू कहलाती है। इनकी जनसंख्या लगभग एक करोड़ दस लाख है।

            एशिया के आदिवासी

       (Indigenous People of Asia)

ऐनू (Ainu/Aynu)

जापान के होकापडो द्वीप के आदिवासी जो रूस के द्वीप में भी आबाद हैं। इनका सम्बंध श्वेत प्रजाति से है।जापान की ऐनू जनजाति की साक्षरता 50 प्रतिशत है। आधुनिकीकरण के कारण इनकी जीवन शैली में परिवर्तन हो रहा है। ये जड़ात्मवाद (जीववाद), बौद्ध तथा रूसी ईसाई धर्म के मानने वाले हैं ।

बहू

बहू शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द अल-बैद से हुई है जिसका अर्थ बदिया अर्थात मरुस्थल के रहने वाले हैं।दक्षिण-पश्चिम एशिया के रहने वाले बहू खानाबदोश कबीले हैं जो ऊंट, भेड़, बकरी तथा घोड़े पालते हैं तथा अपने पशु-धन के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर पानी और चारे की तलाश में घूमते रहते हैं। इनकी कुल जनसंख्या लगभग दस लाख है।

 चकमा (Chakmas/Changma)

बंग्लादेश के चटगाँव की पहाडियों में रहने वाली जनजाति इनमें से कुछ चकमा भारत के त्रिपुरा राज्य की पहाडियों में भी रहते हैं। 

चिन 

म्यांमार के आदिवासी चिन पश्चिमी म्यांमार की पहाड़ियों की खेती करते हैं।

में रहते हैं। इनकी जनसंख्या लगभग 16 लाख है। इनमें से कुछ लोग मिज़ोरम तथा बंगलादेश में भी रहते हैं। 

डयाक (Dayak / Dyak)

डयाक बोर्नियो द्वीप के आदिवासी हैं। इनमें से अधिकतर आखेट युग में हैं। इनकी 200 से अधिक उप-प्रजातियाँ हैं 

 हमोंग (Hmong ) 

 ये थाइलैंड के आदिवासी हैं और अफीम की खेती करते हैं, जिसकी सबसे बड़ी माँग संयुक्त राज्य अमेरिका में है।

इसकी चरस, गांजे, अफीम तथा हीरोइन के रूप में अवैध तौर पर तस्करी की जाती है।

इबान (Iban)

यह इयाक जनजाति की एक उप-जनजाति है, जो मलेशिया के सबाह राज्य में रहती है। कुछ इबानी कबीले ब्रुनई तथा इण्डोनेशिया के प. कलिमण्टान राज्य में रहते हैं।

किर्गीज / कज्जाक (Kirghiz-Kazak)

मूल रूप से इनका सम्बंध तर्क प्रजाति से है। मध्य एशिया की इस जनजाति के अधिकतर लोग किर्गिस्तान में रहते

हैं। भेड़, बकरी, घोड़े आदि पालना इनके जीवन का आधार है। इनके अधिवास को युर्त (Yurt) कहते हैं।

कुर्द (Kurds)

ईराक एवं तुर्की के कुर्दिस्तान के लोगों को कुर्द कहते हैं। यह दक्षिण-पश्चिम एशिया के इराक, ईरान, सीरिया,

लेबनान, तुर्की, जॉर्जिया तथा अर्मीनिया में रहते हैं। इनकी भाषा फ़ारसी से मिलती-जुलती है। यह विश्व की सबसे

बड़ी जनजाति है, जिसका अपना कोई देश नहीं हैं।

इफुगाव ( Ifugao)

यह फिलीपीन्स के इफुगु प्रान्त के रहने वालों को इफुगाव जनजाति कहते हैं। ये सीढ़ीनुमा खेती के लिये

प्रसिद्ध हैं। 

पख्तून (Pakhtoons)

यह अफ़गानिस्तान की जनजाति है, जिसका सम्बंध आर्यों से है। इनका सम्बंध युद्ध और सेना से है। यह निडर जनजाति पश्तो भाषा बोलती है, जो फारसी का एक विकृत स्वरूप है।

कलिंगा (Kalinga ): 

यह फिलीपीन्स के कलिंगा राज्य में निवास करने वाली एक आदिम जनजाति है तथा अपने है।

जीवन निर्वाह के लिए खेती करती हैं।

सकाई (Sakai)

मलेशिया, आदिवासी, सकाई, नीग्रीटो प्रजाति से हैं। घाटियों, जंगलों तथा मैदान में रहने वाली सकाई जनजाति आखेट युग में है। आखेट के लिये यह लोग बलो पाइप (Blow-Pipe ) का उपयोग करते हैं।

सीमांग (Semang)

छोटे कद के सीमांग आदिवासी नीग्रीटो उपजाति से सम्बन्धित हैं। पर्वतों तथा जंगलों में रहने वाले मलेशिया के यह आदिवासी आखेट युग में है।

टोयला (Toala) 

सुलवासी अथवा सेल्बीज ‘इंडोनेशिया’ के ये आदिवासी आखेट युग में हैं तथा नीग्रेटो प्रजाति से सम्बंधित हैं। ये तीर-कमान से आखेट करते हैं तथा अपने तीर की नोक पर एक प्रकार के जहर का उपयोग करते हैं।

वैद्दा (Vedda)

श्रीलंका के आदिवासी वैद्दा आखेट युग में हैं। आखेट के अतिरिक्त कन्द-मूल, फल-फूल तथा प्रारंभिक अवस्था की खेती करते हैं।

आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड के आदिवासी

(Indigenous People of Australia and New Zealand)

अरन्टा (Arunta)

अरन्टा आस्ट्रेलिया के मरुस्थल में रहने वाली जनजाति है। इनका जीवन आधार कन्द-मूल तथा आखेट पर है।

गुरिंदजी (Gurindji)

आस्ट्रेलिया के उत्तरी भाग में विक्टोरिया बेसिन की आखेट युग की जनजाति।

टिवी (Tiwi)

यह डार्विन नगर के निकट बार्थस्ट तथा मेलाविली द्वीपों पर रहने वाली जनजाति है। यह अपने शरीर को गेरू से रंगते हैं। छिपकली, साँप, सूअर, जंगली भैंस, कछुए तथा मछली आदि का शिकार करते हैं। लड़कियों का शिशु अवस्था में ही 22 वर्षीय व्यक्ति से विवाह कर दिया जाता है, जिनको 14 वर्ष की आयु में अपने पति के साथ रहना होता है। किसी धनी के 20 स्त्रियाँ भी होती हैं।

वालपीरि (Warlpiri)

ये लोग उत्तरी आस्ट्रेलिया के टनामाना मरुस्थल के रहने वाले हैं। ये अलायस चश्मे (Alice Spring) के आस-पास रहते हैं। इनकी कुल जनसंख्या पाँच से छह हजार है।

यूरेशिया के आदिवासी
(Indigenous People of Eurasia)

एस्कीमो (Eskimo)

एस्कीमो साइबेरिया के टुण्ड्रा प्रदेश के आदिवासी हैं, जो मछली, करेबू तथा रेडियर का शिकार करते हैं। शीत में इग्लू (बर्फ का घर) बनाकर रहते हैं। ऋतु परिवर्तन के साथ ये स्थान परिवर्तन करते रहते हैं।

युकाघिर (Yukaghir)

साइबेरिया के मध्य तथा पूर्वी भाग के टुण्ड्रा प्रदेश के रहने वाले युकाघिर एस्कीमो की एक उपजाति है। ये लोग वर्खोयांस्क तथा स्टानोबाई के पर्वतीय क्षेत्र में कोलेमा नदी घाटी में रहते हैं।मछली एवं रेडियर का शिकार करते हैं तथा शीतकाल में इग्लू में रहते हैं। ये हस्की कुत्ते पालते हैं जो स्लेज गाड़ी (बर्फ पर चलने वाली गाड़ी) को खींचने के काम में लाये जाते हैं।

उत्तरी अमेरिका के आदिवासी(Indigenous People of North America)

अरावक (Arawak)

यह लोग एण्टीलिस तथा बहामास द्वीप (वेस्टइंडीज़) के रहने वाले हैं। विश्वास किया जाता है कि कोलम्बस का सम्पर्क सबसे पहले इन्हीं लोगों से हुआ था

अपाची (Apache, Tineh, Tinde)

अपाची दक्षिण-पश्चिम संयुक्त राज्य अमेरिका के रहने वाले है। इनके मुख्य क्षेत्र अरिज़ोना, कोलोरेडो, न्यू मैक्सिको तथा ओकलाहोमा राज्य हैं । कुछ अपाची फोनिक्स, डेन्वर, सानडियागो तथा लॉस एंजलिस जैसे महानगरों में बस गये हैं।

ब्लैकफुट (Blackfoot, Sikshika)

रॉकी पर्वत के पूर्व में सास्केचवान नदी के बेसिन में ब्लैकफुट आदिवासी रहते हैं (Fig. 9.5)। ब्लैकफुट रेड इण्डियन कीएक उपजाति है। ये घुड़सवारी करते हैं तथा जंगली भैंसे का शिकार करते हैं। भैंसे की खाल के कपड़े बनाते है तथा खाल से ही अपने तम्बू (tent) बनाते हैं।

बेल्ला, कूला, हैदा तथा तिलिंगित
(Bella, Coola, Hiada, Tlingit)

ये सभी आदिवासी मछलियों का शिकार करते है। अलास्का से कोलम्बिया के तट तक इनकी बस्तियाँ हैं। यह प्रशांत महासागर से आधुनिक विधियों के द्वारा हैलिबट, कॉड तथा सेलमन मछलियों का शिकार करते है। इनकी आय तथा जीवन स्तर ऊँचा है।

क्री (Cree)

कनाडा के शीतकटिबंध के आदिवासी करी, जेम्स-खाड़ी के आसपास रहते हैं। अधिकतर करी क्यूबेक, ओंटारियो, मैनिटोक, अल्बटी तथा सास्कंचवान राज्यों में रहते हैं। इनकी कुल जनसंख्या लगभग दो लाख है। ये मछलियों तथा पशुओं का शिकार करते हैं।

क्रीक (Creek-Muskogee) 

अल्बामा, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, लूसियाना, ओकलाहोमा, टक्सास, द. केरोलिना तथा मध्य जॉर्जिया के आदिवासी। इनके जीवन पर शिक्षा तथा नगरीकरण का अत्यधिक प्रभाव पड़ा है।

क्रो (Crow)

उत्तरी अमेरिका की यलोस्टोन नदी घाट में क्रो नामक आदिवासी रहते हैं। ये पशुओं का शिकार करते हैं तथा कन्द-मूल, फल-फूल पर अपना जीवन व्यतीत करते हैं।

होपी-यूमा (Hopi-Yuma)

अरिजोना के मरुस्थल में होपी जनजाति के लोग जहां भी सम्भव हो सिंचाई करके खेती करते हैं। ये सघन बस्तियों में रहते है, जिनको प्युबलो (Pueblo) कहते हैं। इनकी मुख्य फसलें मक्का, सब्जियाँ, खरबूजे, खीरे तथा कपास हैं। यह एक महिला प्रधान समाज है। भूमि पर महिलाओं ही का अधिकार होता है।

इन्यूट (Inuit, Eskimo, Innu Yupik, Inupiaq)

अलास्का, नूनावट, ग्रीनलैंड, कनाडा तथा निकटवर्ती द्वीपों के एस्कीमो को इन्यूट कहा जाता है। इनका सम्बंध मंगोल प्रजाति से है। सर्दियों में ये इग्लू में रहते है तथा स्लेज गाड़ी को चलाने के लिये अच्छी नस्ल के हस्की कुत्ते पालते हैं।

मैटिस (Metis, Bois, Brule)

मनीटोबा, सास्केचवान, मोन्टाना (कनाडा) की जनजाति जो मंगोल तथा श्वेत प्रजाति का मिश्रण हैं।

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