आदाब तबस्सुम a love story part 5

 आज मैं लेकर आया हूं आप लोगों के लिए एक स्वीट सी लव स्टोरी का 5वा भाग। अगर आपने अभी तक आदाब तबस्सुम के पिछले भाग नही पढ़े हैं तो फिर उन्हें पढ़िए जाकर वरना फिर आगे की कहानी में मजा नहीं आने वाला आपको। तो बिना टाइम गवाएं मैं शुरू करने जा रहा हूं आगे की कहानी बिना किसी रीकैप के।

 Parts 👉  1  2  3  4
   

क्या हुआ ? तबस्सुम उनींदी आवाज में पूछती है।
कुछ नहीं तुम सो जाओ ,राधिका कहती है।
वैसे अब आप को भी सोना चाहिए, राधिका से सदफ कहता है।
जी मैं तो सोने ही जा रही हूं आप तबस्सुम से बातें करिए क्योंकि अब वो सोने वाली नहीं।
पता है, इतना कहकर वो तबस्सुम के बेड के पास रखे स्टूल पर आकर बैठ जाता है।
मैं आपके अब्बू को फोन कर दूं?
अभी नहीं थोड़ी और शाम हो जाने दीजिए।

घर में सब परेशान होंगे!
नहीं होंगे क्योंकि हमने कहा था कि हम राधिका के साथ उसके घर जायेंगे शाम। में।
Ok , as you wish. फिर दोनों चुप हो गए तबस्सुम दीवार घड़ी की तरफ देखने लगी और सदफ तबस्सुम की तरफ । 
अच्छा एक बात पूछें आपसे? अचानक ही सदफ को पता नहीं क्या सूझी।
जी पूछे। 
रहने देते है कभी बाद में पूछेंगे, सदफ बात को जाने देता है।
बाद में क्यों? अभी क्यों नहीं?
अभी आप समझ न पाएं शायद , और फिर अभी आप मुझे नियतदार भी नहीं लगती।
मतलब क्या है आपका ?आपके सवालात के जवाब देने के लिए मेरी नियत अच्छी नहीं है?  
सदफ कुछ नहीं कहता मुस्कुराते हुए उठ कर कहीं चला जाता हैं। वो उसे पीछे से पुकारती है लेकिन वो सुनता नहीं ।
लगभग 15मिनट के बाद जब सदफ लौटता है तो उसके हाथों में दो कप कॉफी होती हैं पैर से स्टूल खींच कर बैठते हुए सदफ एक कप तबस्सुम की तरफ बढ़ा देता है। 
लीजिए कॉफी पीजिए हमारे साथ आपकी शर्त हारने की खुशी में ।हम इस पल के लिए आपसे शर्त जीते थें,समझी तबस्सुम साहिबा।
तबस्सुम कुछ नहीं कहती बस चुपचाप कॉफी ले लेती है।

वैसे आज हमने किस कलर की शर्ट पहनी है ? सदफ फिर बोलता है।
तबस्सुम को ये निहायती सस्ता और सरल सवाल लगा जिसका जवाब भी उसने बेफिक्री से दिया , ग्रे।
तो डेफिनेटली हम आपको बंदर नजर आ रहें होंगे आज ?  तबस्सुम को निहायती सस्ता लगने वाला सवाल काफी महंगा जान पड़ा । नहीं तो आपसे भला ये किसने कह दिया ?
आपने ।

हमने ? नहीं तो?
हां आपने ही मिस , राधिका बता रहीं थीं मेरी तारीफों के बारे में जो आपने उनसे की हैं मेरी।
नहीं हमने ये नहीं कहा था बल्कि हमने तो कुछ और कहा था ,इन लोगों ने कुछ और सुना और समझ कुछ और लिया।
तो आपने क्या कहा था?
हमने कहा था कि…….
हां, आपने कहा था कि….
हमने कहा था की….हमे आराम करना है सिस्टर बोल कर गईं हैं। उसने बात बदलने की कोशिश की। सिस्टर की छोड़िए, हमारे बारे में बताइए क्या कहा था आपने?
देखिए आप परेशान न करिए हमें।तो अब हम आपको परेशान कर रहें हैं?नहीं हमने ये नहीं कहा।अच्छा ये बात हटाइए दूसरी बात पूछूं?
हां दूसरी पूछिए।
आपको हमारी नीली आंखें कैसी लगती हैं?
हमने कहा न ये लोग कुछ भी ढंग से नहीं सुनती ,आप इनकी बात पर यकीन न करें।
हम इनकी बात पर यकीं नहीं करते इसीलिए तो आपसे पूछ रहें हैं वरना तो राधिका बोल रहीं थीं की आपको हमारी। आंखे काफी अच्छी लगती हैं।
देखिए…।हुं ।हमें सोना है।
हमारे सवाल का जवाब दे दीजिए फिर सो जाइए।
हमने कहा न।
वही तो क्या कहा था आपने ।
प्लीज!
सदफ समझ गया की अब वो बहुत परेशान हो चुकी है ज्यादा कुछ कहा तो रोने भी लग सकती है। 

वैसे हम आपके सारे जवाब जानते हैं,       उसे देखता हुआ सदफ कहता है।
इसके बाद कमरे में ख़ामोशी छा जाती है । सदफ अपने फोन में कुछ करने लगता है और तबस्सुम अब भी घड़ी की टिक टिक ही देख रही होती है। वैसे तो सदफ यहाँ बस चार घंटे ही जॉब करता है ।दोपहर बाद वो अपने रूम पर पढ़ाई करने चला जाता है।लेकिन आज वो सारा दिन हॉस्पिटल में ही रहा और मिजाज देख के तो लग रहा है मिस्टर का की अब रात भी यही गुजर कर देंगे।    

 अरे हाँ, वो मैंने आपके अब्बू को कॉल कर दी थी वो आते ही होंगे। सदफ फोन में देखते हुए बोला।                    

अच्छा।
वैसे आज हम दोनों के बीच कुछ स्ट्रेंज नहीं हुआ ?
क्या मतलब? क्या स्ट्रेंज हुआ भला?
चार घंटे हो गए है मिले हमें और इतनी देर में आपने एक बार भी हमसे झगड़ा नहीं किया, ऐसा हमारे बीच कभी नहीं हुआ।   हम कब झगड़ते है आपसे? तबस्सुम गुस्सा होते हुए बोली।               तो हम झगड़ते है आप से ?                   
नहीं हमारे कहने का मतलब ये नहीं था। वो अपनी आवाज़ धीमी करती हुई बोली ।           तो और क्या था ?
ठीक है झगड़ते है लेकिन परेशान भी तो करते हैं आप।                                    
यानी आज हम आपको परेशान नहीं कर रहें हैं?  आप ऐसी बातें क्यों कर रहें है आज हमसे ? तबस्सुम थोड़ा-सा चिढ़ गई।
हम तो रोज़ ही ऐसे बातें करते हैं हाँ वो बात दूसरी है कि आज आप भी हमसे बात कर रहीं हैं।
हाय मेरी बच्ची ! या …अल्लाह ..तबस्सु.. अम्मी अब्बू और हुसैन कमरे में दाखिल हो चुके थे और एक माँ का emotional drama भी शुरू हो चुका था। अम्मी दौड़ती हुई सीधे तबस्सुम का माथा , हाथ, पैर सब देखने लगती हैं ,कहाँ लग गया मेरी गुड़िया को , अरे बुरा हो उस मर्द्दुद , नासपीटे ट्रक ड्राइवर का , उस के घर में बाढ़ आ जाए, अरे बिस्तर से गिरे तो कमर टूट जाए कमीने की मेरी फूल सी बच्ची को टक्कर मार दी।

अम्मी वो अम्मी , उसने ट्रक को टक्कर मारी थी आपकी बच्ची को नहीं , हुसैन ने बीच में टोका।अरे किसी को मारी लेकिन चोट तो मेरी तबस्सुम को लगी ना , उस पापी तो अल्लाह दोजख में भी जगह ना दे…..         आंटी जी , अबकी सदफ बीच में बोला ।   हाँ बेटा ?                 
वो ट्रक में ऐक की मौत हो चुकी है शायद ड्राइवर या ….               
 या अल्लाह! उसकी रूह को जन्नत में सु

कून अता फरमा। अम्मी ने तुरंत दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठा दिए। अब ये भी इंसान का एक रूप है थोड़ी सी परिस्थिति बदलती नहीं की तुरंत बात बदल जाती है।
कैसे हुआ बेटा ये सब कुछ? उसके अब्बू उससे पूछते है।          
हमें भी नहीं मालूम अब्बू, हम तो रोज़ की तरह ही मस्त सीट पर बैठे थे।
सदफ उठकर बाहर चला जाता है जाते हुए देखता है कि राधिका तकिये से अपने दोनों कान दबाये है उसे थोड़ी हंसी आ जाती है।
एम्बुलेन्स कितनी देर में पहुंची थी?
पता नहीं अब्बू हम तो सदफ के साथ आए हैं बाइक पर ।          
पर दीदी आप तो कहती थी कि सदफ की बाइक पर नहीं बैठेगी कभी फिर। हुसैन चिढाता हुआ बोला।                        
 हुसैन हम आपके दांत तोड़ देंगे।
हमारे दाँत आपके हाथ से ज्यादा मजबूत है , कहता हुआ हुसैन वार्ड के बाहर भाग गया।

अब आगे कहानी क्या मोड़ लेगी , क्या मौका देखकर सदफ भाई साहब अपने दिल की बात कह पाएंगे?ये देखना वाकई एक शानदार अनुभव रहेगा। वैसे आप ….हाँ आप , आपने अपने दिल की बात कही है कि नहीं अपनी तबस्सुम से ? 

share also

Leave a comment

error: Content is protected !!