आदाब तबस्सुम A Love story 7

मेरे प्यारे दोस्तों,एक प्यारी सी प्रेम कहानी अपने अंतिम चरण पर आ गई है। जिसे सुनाते हुए मैं हर्षित था और जिसे सुन कर आप सभी आनंदित। वैसे तो आप सभी ही जान चुके हैं की तबस्सुम भी सदफ को पसंद करने लगी है लेकिन कब ? इसका जिक्र तो मैने किया ही नहीं क्योंकि मोहब्बत कब किस पल होती है अंदाजा भी नहीं लगता वो तो बस सीने में एक बार धड़कन की तरह धड़कती है और अचानक ही हमे अहसास होता है” oh God I fall in love….” फिर भी अगर आपने ध्यान दिया हो तो आपको लग जायेगा की तबस्सुम सदफ को शुरू से ही पसंद करती है बस बात इतनी सी है की उसे पता नहीं चला जैसे अभी तक हमें भी नहीं पता था। अब इन दोनों की मोहब्बत का अंजाम क्या होगा चलिए देखते हैं।

सदफ तो चला गया लेकिन अपनी यादें छोड़ गया तबस्सुम के लिए। अब कोई अगर उसे देखे तो मानेगा ही नहीं की ये वही जिद्दी , बेवकूफ लड़की है जो कभी अपना बचपना छोड़ने का नाम नहीं लेती थी। पहले से ज्यादा गंभीर , स्थिर हो गई थी अब वो । जब भी उसे सदफ की याद आती तो छत पर चली जाती ,ये सोचकर की कहीं से तो सदफ बोलेगा, काफी देर तक छत पर रुके थे आपके लिए, सदफ के रूम के नीचे खड़ी हो जाती कभी की सदफ ऊपर से आवाज देगा , “हमारी कॉफी याद हैं न?

Parts 👉 1 2 3 4 5
अब्बू एक बात पूछें आपसे? तबस्सुम डाइनिंग टेबल पर बैठी हुई कहती है। 
हां पूछो ।
अब्बू वो …..सदफ नहीं दिखाई देते आजकल?
लो तुम्हें कुछ पता ही नहीं?
नहीं!
सदफ के अब्बाजान अहमद साहब आएं थें उसे अपने साथ दिल्ली लेकर चलें गएं। 
दिल्ली क्यों ले गए?
अरे भई,इतना बड़ा हॉस्पिटल है उनका दिल्ली में, उसे संभालने के लिए कोई चाहिए की नहीं? पर जो भी कहो याद बहुत आती है उस लड़के की। बहुत अच्छा नेचर था सदफ का ,गया था हॉस्पिटल तुम्हारी सहेली को डिस्चार्ज करवाया था और तुम्हारी अम्मी से कहा था कि तुम्हारा ध्यान रखे, बहुत उदास था, ये सब बाते तुम्हारी अम्मी ने मुझसे बताई थी। मुझे तो सदफ रास्ते में मिला था मुझे देखते ही सदफ गाड़ी रोककर मेरे पास आया था । अहमद साहब कह रहे थे कि दिल्ली में एक अच्छी सी लड़की देखकर सदफ को सैटल कर देंगे। 
सदफ उस लड़की से शादी कर लेंगे?
और क्या भई अपने अब्बा की हर बात मानता है वो।
तबस्सुम आज कॉलेज जाएंगी या नहीं, सुबह सुबह अम्मी कहती है।
जाऊंगी ।
तो जल्दी आ कब जायेगी हुसैन बाहर तेरा इंतजार कर रहा है।
दीदी हमको अच्छा नहीं लगता अब स्कूल जाते हुए, पहले सदफ की बाइक पर जाने में मजा आता था।
कर ली न अपनी आदत खराब तब तो माना करती थी तो माने नहीं।
अच्छा दी आपको सदफ की याद आती है?
सटअप! चुपचाप चलो बस।
दी बच्चों पर गुस्सा नही दिखाते सदफ कहते थे।
प्लीज हुसैन आप हमसे सदफ के बारे में कोई बातचीत मत करिए।
अब तबस्सुम के दिन ऐसे ही बीतने लगे थे गुस्सा करते हुए, रोते हुए, भूखे रहते हुए।
हुसैन जा जाके देख तबस्सुम उठी की नहीं? 
हुसैन तबस्सुम के कमरे में चला जाता है और अम्मी बड़बड़ाती रहती है पता नहीं क्या हो गया इस लड़की को रोज रोज का यही नाटक।
तबस्सुम हुसैन को बस पर बिठा देती है और दस मिनट बाद अपनी बस पर बैठ जाती है। वहीं रोज की आदत जो करीब महीने डेढ़ महीने से है, चुपचाप खिड़की के पास वाली सीट पर बैठकर सिर बाहर निकाल लेती है। अब उससे कोई बात करने की कोशिश नही करता क्योंकि वो अब बात करना पसंद नहीं करती।
लौटते वक्त भी यही हाल था पर छोटे मोटे मजाक पर आने वाली हसीं को भरसक रोकने का प्रयास करती पर हँस पड़ी अंततः। ये उसकी इस महीने की पहली हसीं थी ।
बस से उतरकर चुपचाप चल रही थी, आज उसे कुछ अच्छा महसूस हो रहा था, घर में दाखिल होती तबस्सुम किन्ही ख्यालों से मुस्कुरा रही थी कि उसका ध्यान एक आवाज ने तोड़ दिया।
आदाब तबस्सुम…..।
तबस्सुम ने देखा सामने तो सदफ उनकी गोद में हुसैन बैठा था और सदफ के अब्बजान भी आए थे।
आदाब, तबस्सुम ने बड़ी नजाकत से अपने चेहरे को उंगलियों पर लाते हुए जवाब दिया, आज उसने पहली सदफ के आदाब का जवाब दिया था।
सदफ मुस्कुरा दिया।
तबस्सुम आप इधर आइए, सदफ के अब्बा ने बुलाया।
जी।
सदफ से बड़ी तारीफ सुनी थी आपकी लेकिन आप तो उनकी तारीफों से आगे निकली।
तबस्सुम मुस्कुरा दी।
वैसे हमने एक बार आपसे कुछ पूछने को कहा था याद है आपको, सदफ तबस्सुम को देखते हुए बोला। 
जी याद है पूछिए।
पूछें।
हां पूछिए।
हमसे निकाह करेंगी?
तबस्सुम ने दोनों हाथ अपने चेहरे पर रख लिए।
आपने जवाब नही दिया।
करेंगे , तबस्सुम ने अम्मी के पीछे छिपते हुए कहा।
 लेकिन हम निकाह पढ़वाने बाइक से आयेंगे बस से नही, बोलिए अब मंजूर है निकाह?
सदफ को पता होता होता है कि तबस्सुम को इस वक्त बहुत शर्म आ रही है, फिर भी वो ऐसा सवाल करता है, ये मानकर की जितना इन्होंने हमे परेशान किया है उससे थोड़ा तो परेशान कर ले।
बोलिए..
हम आपकी बाइक पर नही बैठेंगे, अपने कमरे की तरफ भागती तबस्सुम मुड़कर जवाब देती है।
सदफ हँस देता है।
तो दोस्तों कैसी लगी आपको  हमारी ये कहानी, यदि अच्छी लगी तो कमेंट में जरूर बताएं और हां ये सफर अभी खत्म नहीं हुआ है  हम जल्द ही लौटेंगे एक नई कहानी लेकर, ok मिलते है अगले ब्लॉग में 


data-ad-layout=”in-article”
data-ad-format=”fluid”
data-ad-client=”ca-pub-4156288301037879″
data-ad-slot=”6269943342″>


window.adsbygoogle || []).push({});

share also

15 thoughts on “आदाब तबस्सुम A Love story 7”

Leave a comment

error: Content is protected !!