A Wild heart episode -41

 वैसे तो वेद दो दिन में एक बार शाम के समय तनु के घर जरूर जाता था लेकिन वो आज सुबह ही तनु के घर पहुँच गया। वो उसे कल की सारी बातें बताकर ही ऑफिस जाना चाहता था। जब वेद उसके घर पहुँचा उस वक्त वो ऑफिस के लिए तैयार हो रही थी । उसे कमरे में तैयार होता देख वेद अरुण के कमरे में चला गया।

और दोस्त….क्या हाल है ? उसके कंधे पर हाथ रखते हुए वेद बोला। 

ठीक हूँ फिर भी जबरदस्ती दवाई खिलाई जाती है। अरुण ने शिकायती लहजे में कहा ।

अरे कौन है वो जो मेरे भाई से जबरदस्ती करें ? वेद उसके साथ ही सोफे पर बैठ कर tv देखने लगा ।

आपकी बहन । उसी तरह मुँह बनाएं उसने जवाब दिया । मेरी बहन..? वो…हाँ मेरी बहन तनु हाँ सही कहाँ वो मेरी ही बहन है …..! 

आप इतनी सुबह-सुबह यहाँ कैसे ? तनु एक प्लेट में कुछ लिए हुए कमरे में आ चुकी थी। प्लेट उसने अरुण की तरफ बढ़ा दी जिसमें फ्रूट्स थे कटें हुए । वेद ने एक पीस उठाने के लिए हाथ बढ़ाया था की तनु ने उसे रोक दिया । ‘आपके लिए नहीं हैं. ..’ हाँ जी अपने दोस्त की इतनी खातिर भाई की फ़िक्र ही नहीं! वेद ने मजाक में कहा था लेकिन तनु के लिए ये मजाक नहीं था , वो वैसे ही कमरे के बाहर चली गयी कोई प्रतिवाद नहीं किया । वेद समझ गया की ये मजाक से कुछ ज्यादा था । वो तुरंत उठकर तनु के पीछे निकल गया देखा तो वो रो रही थी । उसे अंदर से बहुत बुरा फील हो रहा था उसे पता था कि उसने क्या कहा है। उसने तनु के कंधे पर हाथ रखा तो उसने हाथ हटा दिया।” I am sorry ” उसने धीरे से बोला। लेकिन तनु ने कोई जवाब नहीं दिया चुपचाप अपने आँसू पोछ लिए । please, माफ़ कर दो।उसने दोनों हाथों से अपने कान पकड़ लिए ।

Sorry 

क्यों करते हो आप ऐसा जबकी जानते हो…. तनु कुछ कहने वाली थी लेकिन उसकी नजर अरुण पर पड़ गयी जो वही पास आकर खड़ा हो गया था वेद की मदद करने के इरादे से । क्यों करते हो आप ऐसा जबकी जानते हो मुझे मेरे हाथों से काटे गएँ फ्रूट्स आपसे शेयर करना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता । हे….ए ! फ्रूट्स…? 

हाँ फ्रूट्स किसने कहा था कि आप ले लो जबकी आपके लिए नहीं थें । तनु ने आँख से उसे कुछ इशारा किया । अच्छा तो फ्रूट्स …. वो तेरा फेवरेट फ्रूट है न पाइनएप्पल ! इसीलिए तु नाराज हो रही है कोई नहीं आज मार्केट से बहुत से पाइन एप्पल ले आऊंगा , चल अब चलें ऑफिस वरना देर हो जाएगी । 

आप चलिए मै कुछ फाइल्स और अपना हैंडबैग लेकर आती हूँ ।  

तनु गाड़ी में बैठ तो गयी लेकिन उसका मुँह अभी भी उतरा था। माफ़ कर दो न तनु आगे से उसे कभी तुम्हारा दोस्त नहीं कहूंगा प्लीज! देखो अगर तुमने मुझे माफ़ कर दिया तो….तो…तो मै तुम्हें शाम को कॉफी के लिए ले चलूँगा । आप भूल जाएंगे न शाम तक ? 

नहीं भूलूंगा प्रॉमिस ।

ठीक है लेकिन आगे से ऐसा मजाक नहीं होना चाहिए । नहीं होगा कभी नहीं होगा ।

वैसे इतनी सुबह-सुबह आप मेरे घर क्या करने आएं थें ? अरे हाँ? मै तो ये बताने आया था की समीर और नंदिनी में सारी अनबन ख़त्म हो गयी है ।

ये मालूम है मुझे कुछ नया बताइये ।    

कल मुझे नंदिनी ने थैंक यू बोला ।

ये बताइये आज सुबह आप मजाक करने के मूड में आएं है । मुझे पता था तुम नहीं मानोगी लेकिन यही सच है की उसने मुझे थैंक यू बोला और मेरे गले लगकर रोई भी बहुत । क्या वाकई ? तनु की आवाज में हैरानी थी । तुम्हारी कसम खा सकता हूँ, वेद मुस्कुराते हुए बोला । काश मै आपको हग कर सकती ! लेकिन सीट बेल्ट पहनी हुई है। दोनों हँसने लगे।

नंदिनी आज ऑफिस ही नहीं आयी । ये दोनों को वहाँ पहुंचने पर पता चला कि नंदिनी समीर को एयरपोर्ट छोड़ने गयी है। वेद जब अपने सिस्टम पर काम कर रहा था तो उसके फोन पर एक msg आया उसने चेक किया तो वो समीर का था ,” जिस पर लिखा था “,क्या मै तुम्हें अभी कॉल कर सकता हूँ? ” वेद ने msg देखते ही समीर को कॉल की। समीर ने कॉल पर कुछ नहीं कहा बस इतना ही बोल पाया ,” तुम्हारा अहसान मै जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगा , तुमने मुझे मेरी खुशियां वापस दे दी थैंक्य” और फिर रोने लगा। कल नंदिनी को संभालने के बाद आज समीर का यूँ रोना… वेद ने समीर को भी समझाते हुए चुप कराने की कोशिश की। जब समीर शांत हो गया तो वेद ने कल के बारे में उससे पूछा । तब समीर ने बताया की नंदिनी उसे वापस अमेरिका भेज रही है आदित्य और रोज को लाने के लिए। उसने मुंबई के सबसे बड़े डॉक्टर से बात कर ली है अगले हफ्ते वो खुद आदित्य को लेकर उनसे मिलने जाएगी। मैने जब ये सब मना किया तो बोली ,” अरे आदित्य को भी तो पता चले की उसकी बुआ क्या चीज है , आखिर मेरा भी तो कुछ फर्ज़ बनता है उसके लिए। जितने दिन आपने करना था कर लिया अब मुझे करने दीजिये वरना मै आपके बेटे को हमेशा-हमेशा के लिए अपना बेटा साबित कर के अपने पास रख लूंगी बहुत पैसा है मेरे पास।” वेद ने समीर के मुँह से ये बातें सुनी तो उसकी आँखों में खुद आंसू आ गये। 

वक्त बीतता रहा अब नंदिनी को बिज़नेस के अलावा अपने लिए फिर अपनी फैमिली के लिए वक्त निकलना पड़ता था। रोज टाइम से घर पहुंचना , रोज समय से सो जाना , वेद से बातचीत करना और जल्द ही कुछ दिन बीत जाने के बाद अपने भाई की फैमिली से मिलने का इंतजार करना उसे अच्छा लगने लगा था । उसे बस दो ही चीजों की टेंशन थी अभिनव के लिए एक टॉप क्लास वकील की और अरुण की। 3 हफ्ते से ज्यादा हो चुके है मगर वो तनु के घर एक बार भी अरुण को देखने नहीं गयी। उसे आज भी लगता है कि उसे देखेगी तो खून खौल जायेगा उसका। अब तो सुना है की ठीक भी हो रहा है तो मेमेरी कभी भी वापस आ सकती है और कभी भी उसके अंदर का दरिंदा जग सकता है । अगर ऐसा हुआ तो तनु अकेली क्या करेगी ? खुद को बचा पायेगी ? काका तो शाम को ही घर चले जातें हैं । जैसे ही ये सवाल नंदिनी के दिमाग़ में घूमते तो वो पागल हो जाती, उसे डर लगने लगता। इस डर को ख़त्म करने के लिए नंदिनी संडे के दिन अपनी गन को जीन्स में लगाएं सीधा तनु के घर पर पहुंच गयी। उसने दरवाजे की घंटी बजाई ।

अरुण क्या तुम देख सकते हो कि कौन है? मै किचन में हूँ । तनु ने रसोई के अंदर से आवाज लगाई। अरुण उस वक्त न्यूजपेपर समझने की कोशिश कर रहा था। हाँ समझने की ही, वो समझना चाहता था की तनु उसे न्यूजपेपर देतें वक्त उसमें से कुछ पेज गायब क्यों कर देती है ? जब उसने तनु की आवाज सुनी तो न्यूजपेपर टेबल पर पटका और दरवाजा खोलना चला गया। आप कौन ? अरुण ने नंदिनी से पूछा । लेकिन नंदिनी ने बिना जवाब दिए ही अंदर आनेकी कोशिश की। प्लीज मैंने आपको यहाँ कभी नहीं देखा, आप बताएंगी की आप कौन है वरना मै आपको अंदर नहीं ले सकता। तनु ने किसी अनजाने को अंदर लेने से मना कर रखा है क्योकि यहाँ काफी उलटे-सीधे किस्म के लोग आतें है मुझे परेशान करने के लिए । अपनी बकवास बंद करो और मुझे अंदर आने दो । मै ऐसा नहीं कर सकता । उसने फिर नंदिनी का रास्ता रोक लिया तो नंदिनी ने उसका कॉलर पकड़ कर उसे धक्का दिया और बन्दूक की नोक उसके सर पर तान दी। 

Nandini 

अरुण चीखने लगा। उसकी आवाज सुनकर तनु किचन से दौड़ती हुई निकली। हटिये मैम, ये क्या कर रही है आप ? जैसे ही तनु आयी अरुण उससे चिपट गया। जैसे कोई बच्चा कोई डरावना खिलौना देखकर अपनी माँ से लिपट जाता है। तनु को इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी न नंदिनी को लेकिन वाकई अरुण काफी डर गया था इतना की उसकी आँखों में आंसू आ गएँ थे। ये डर गया है सच में या सिर्फ नाटक कर रहा है ? मैम मै आपसे बात करती हूँ अभी। अरुण…आप प्लीज मुझे छोड़कर नॉर्मल होके सोफे पर बैठ जाइये। अरुण अभी भी कांप रहा था मगर तनु उसे अपने हाथ से हटा भी नही पा रही थी क्योकि उसके हाथ बेसन में सने हुए थे । देखो ये मेरी दोस्त है और बहुत अच्छी एक्टर भी तो अपने सीन की रिहर्सल कर रही थी अगर आप न होतें तो ये मेरे साथ भी ऐसा ही करती है। अपनी अगली फिल्म के शूट से अभी लौटी है इसीलिए काफी दिन से मुलाक़ात नहीं हुई । आपको इनसे डरने की कोई जरूरत नहीं है आप मुझपर भरोसा रखिये, मै हूँ यही आपके पास ही प्लीज आप थोड़ी देर बैठ जाइये। तब तक मै चाय ले आऊं? तनु के काफी समझाने के बाद वो चुपचाप बैठ गया जाकर। तनु और नंदिनी रसोई में चली गयी। उसपर गन रखने की क्या जरूरत थी आपको ? प्लेट में पकौड़िया रखते हुए तनु बोली।

वो मुझे अंदर नहीं आने दे रहा था मुझे लगा की तुम्हारे साथ… मैने ही मना किया था उसे सर के कहने पर क्योंकि एक दो लोग आएं थे जो उसे कंपनी के बारे में आपके बारे में और भी जो मन में आ रहा था बोल रहें थें । तब से हमने ये कदम उठाया था। वैसे आप ये गन किस लिए लाई हैं? तुम्हारे लिए सोचा सेफ्टी रखनी जरूरी है । नहीं मुझे नहीं लगता कि मुझे इसकी कोई जरूरत है । अच्छा , तो क्या उसकी हालत अभी भी पहले जैसी है ? पहले से सुधार है बाकी आप अभी देख ही चुकी है । इसकी कंपनी घाटे में जा रही है नुकसान हो रहा है , मैने पैसे पे किये है अगर इसकी हालत ऐसी ही रही तो देखो….. आप कंपनी टेकओवेर करने वाली थी तो उसका क्या हुआ ? सिग्नेचर चाहिए अरुण के ऐसे नहीं होगा । तो अब …… 

देखा जायेगा ।

 OK, चलिए चाय पीते है चलकर टेंशन ही कम होगी कुछ। सही कहा ,और हाँ मुझे दोबारा मुख़ातिब करवा देना अरुण से ताकि उसे लगे वो मुझसे काफी मिला नहीं ।

उसे ऐसे ही लगता है की वो आपसे नहीं मिला । तनु ने पकौड़ी की प्लेट उठाते हुए कहा ।

हां ये भी सही ही है। नंदिनी ने चाय की तस्तरी उठा ली ।

To be Continued. …..

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